Fagan Pheri Rahasya
Another exciting bit of representative placeholder content. This time, we've moved on to the second column.
Why This Initiative
In March 2024, students from Tapovan Sanskar Peeth, Shatrunjay Youth Mandal, and Lok Bharati School, supported by the forest department, cleaned Shatrunjay hills, collecting 100 bags of garbage, but discovered damaging practices during the Fagan Ferry journey that needs to be avoided during this pheri.
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And lastly this, the third column of representative placeholder content.
अन्य क्षेत्रे कृतं पापं तीर्थ क्षेत्रे विनश्यति। तीर्थ क्षेत्रे कृतं पापं वज्रलेपो भविष्यति।।
तीर्थ और आध्यात्मिक शुद्धि प्राचीन काल से ही तीर्थ स्थलों को मोक्ष प्राप्ति और आत्मशुद्धि का माध्यम माना जाता है। जब कोई व्यक्ति पवित्र स्थानों पर जाकर सच्चे मन से प्रायश्चित करता है, तो उसके पूर्व में किए गए पाप समाप्त हो सकते हैं। लेकिन यदि कोई तीर्थ स्थान की पवित्रता का अपमान करता है और वहां भी अधर्मपूर्ण कार्य करता है, तो उसका दंड और भी कठोर हो जाता है। यह सूक्ति हमें यह सिखाती है कि केवल तीर्थ यात्रा से ही नहीं, बल्कि आचरण और विचारों की शुद्धता से ही वास्तविक मोक्ष संभव है। नैतिकता और कर्म का महत्व हमारे धर्मशास्त्रों में कर्म का अत्यधिक महत्व बताया गया है। यह सूक्ति हमें यह स्मरण कराती है कि किसी स्थान की पवित्रता से अधिक महत्वपूर्ण हमारा स्वयं का चरित्र और आचरण होता है। यदि हम पुण्य स्थलों का सम्मान नहीं करते और वहां भी अनुचित कर्म करते हैं, तो वह पाप साधारण नहीं रह जाता, बल्कि और भी प्रबल हो जाता है। इसलिए, सच्चे अर्थों में तीर्थ यात्रा वही है, जो हमारे मन और आत्मा को शुद्ध करे। आधुनिक संदर्भ में इस सूक्ति का महत्व आज के समय में भी इस सूक्ति का संदेश उतना ही प्रासंगिक है। चाहे वह किसी धार्मिक स्थल की पवित्रता बनाए रखना हो या फिर किसी प्रतिष्ठान या कार्यस्थल में नैतिकता का पालन करना, यह विचार हमें सदैव सचेत करता है। हर स्थान का एक विशेष महत्व होता है, और यदि हम किसी शुभ व सकारात्मक स्थान पर अनुचित कार्य करते हैं, तो उसके दुष्परिणाम गंभीर हो सकते हैं। इस प्रकार, यह सूक्ति हमें सद्गुणों, नैतिक मूल्यों और संयम का पालन करने की प्रेरणा देती है।